श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

आसिक्तमार्गां गन्धोदैः करिणां मदशीकरैः।

स्वामिनं प्राप्तमालोक्य मत्तां वा सुतरामिव॥ २६

āsiktamārgāṃ gandhodaiḥ kariṇāṃ madaśīkaraiḥ|

svāminaṃ prāptamālokya mattāṃ vā sutarāmiva|| 26

अर्थ

उस समय अयोध्यापुरीके मार्ग सुगन्धित जल और हाथियोंके मदकणोंसे सिंचे रहते। ऐसा जान पड़ता, मानो यह नगरी अपने स्वामी भगवान् श्रीरामको देखकर अत्यन्त मतवाली हो रही है॥ २६॥

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