श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.32

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

विद्रुमोदुम्बरद्वारैर्वैदूर्यस्तम्भपङ्क्तिभिः ।

स्थलैर्मारकतैः स्वच्छैर्भातस्फटिकभित्तिभिः॥ ३२

vidrumodumbaradvārairvaidūryastambhapaṅktibhiḥ |

sthalairmārakataiḥ svacchairbhātasphaṭikabhittibhiḥ|| 32

अर्थ

महलोंके द्वार तथा देहलियाँ मूँगेकी बनी हुई थीं। उनमें जो खंभे थे, वे वैदूर्यमणिके थे। मरकतमणिके बड़े सुन्दर-सुन्दर फर्श थे, तथा स्फटिकमणिकी दीवारें चमकती रहती थीं॥ ३२॥

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