श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

ते तु ब्रह्मण्यदेवस्य वात्सल्यं वीक्ष्य संस्तुतम्।

प्रीताः क्लिन्‍नधियस्तस्मै प्रत्यर्प्येदं बभाषिरे॥ ५

te tu brahmaṇyadevasya vātsalyaṃ vīkṣya saṃstutam|

prītāḥ klinnadhiyastasmai pratyarpyedaṃ babhāṣire|| 5

अर्थ

जब आचार्य आदि ब्राह्मणोंने देखा कि भगवान् श्रीराम तो ब्राह्मणोंको ही अपना इष्टदेव मानते हैं, उनके हृदयमें ब्राह्मणोंके प्रति अनन्त स्नेह है, तब उनका हृदय प्रेमसे द्रवित हो गया। उन्होंने प्रसन्‍न होकर सारी पृथ्वी भगवान्‌को लौटा दी और कहा॥ ५॥

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