श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.12.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

ततः४ प्रसेनजित् तस्मात् तक्षको भविता पुनः।

ततो बृहद्बलो यस्तु पित्रा ते समरे हतः॥ ८

tataḥ prasenajit tasmāt takṣako bhavitā punaḥ|

tato bṛhadbalo yastu pitrā te samare hataḥ|| 8

अर्थ

विश्‍वसाह्वका प्रसेनजित्, प्रसेनजित्का तक्षक और तक्षकका पुत्र बृहद्बल हुआ। परीक्षित्! इसी बृहद्बलको तुम्हारे पिता अभिमन्युने युद्धमें मार डाला था॥ ८॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्राचीन प्रतिमें ‘ततः..पुनः’ यह पूर्वार्ध नहीं है, इसके स्थानपर वर्तमान प्रतिमें आया हुआ ‘भविता...मित्रजित्’ यह बारहवाँ श्‍लोक दिया है, इसमें भी ‘मरुदेवो’ के स्थानमें ‘मनुदेवो’ पाठ है।

    (मुद्रित पृष्ठ 65)

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