श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

देवा ऊचुः

विदेह उष्यतां कामं लोचनेषु शरीरिणाम्।

उन्मेषणनिमेषाभ्यां लक्षितोऽध्यात्मसंस्थितः॥ ११

videha uṣyatāṃ kāmaṃ locaneṣu śarīriṇām|

unmeṣaṇanimeṣābhyāṃ lakṣito'dhyātmasaṃsthitaḥ|| 11

अर्थ

देवताओंने कहा—‘मुनियो! राजा निमि बिना शरीरके ही प्राणियोंके नेत्रोंमें अपनी इच्छाके अनुसार निवास करें। वे वहाँ रहकर सूक्ष्मशरीरसे भगवान्‌का चिन्तन करते रहें। पलक उठने और गिरनेसे उनके अस्तित्वका पता चलता रहेगा॥ ११॥

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