॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.13.15
तस्माद् बृहद्रथस्तस्य महावीर्यः सुधृत्पिता।
सुधृतेर्धृष्टकेतुर्वै हर्यश्वोऽथ मरुस्ततः॥ १५
tasmād bṛhadrathastasya mahāvīryaḥ sudhṛtpitā|
sudhṛterdhṛṣṭaketurvai haryaśvo'tha marustataḥ|| 15
अर्थ
परीक्षित्! जनकका उदावसु, उसका नन्दिवर्धन, नन्दिवर्धनका सुकेतु, उसका देवरात, देवरातका बृहद्रथ, बृहद्रथका महावीर्य, महावीर्यका सुधृति, सुधृतिका धृष्टकेतु, धृष्टकेतुका हर्यश्व और उसका मरु नामक पुत्र हुआ॥ १४-१५॥