श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तं निर्वर्त्यागमिष्यामि तावन्मां प्रतिपालय।

तूष्णीमासीद् गृहपतिः सोऽपीन्द्रस्याकरोन्मखम्॥ २

taṃ nirvartyāgamiṣyāmi tāvanmāṃ pratipālaya|

tūṣṇīmāsīd gṛhapatiḥ so'pīndrasyākaronmakham|| 2

अर्थ

उनका यज्ञ पूरा करके मैं तुम्हारे पास आऊँगा। तबतक तुम मेरी प्रतीक्षा करना।’ यह बात सुनकर राजा निमि चुप हो रहे और वसिष्ठजी इन्द्रका यज्ञ कराने चले गये॥ २॥

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