श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.1

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अथ चतुर्दशोऽध्यायः

चन्द्रवंशका वर्णन

श्रीशुक उवाच

अथातः श्रूयतां राजन् वंशः सोमस्य पावनः।

यस्मिन्‍नैलादयो भूपाः कीर्त्यन्ते पुण्यकीर्तयः॥ १

athātaḥ śrūyatāṃ rājan vaṃśaḥ somasya pāvanaḥ|

yasminnailādayo bhūpāḥ kīrtyante puṇyakīrtayaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! अब मैं तुम्हें चन्द्रमाके पावन वंशका वर्णन सुनाता हूँ। इस वंशमें पुरूरवा आदि बड़े-बड़े पवित्रकीर्ति राजाओंका कीर्तन किया जाता है॥ १॥

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