॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.14.28
निशम्याक्रन्दितं देवी पुत्रयोर्नीयमानयोः।
हतास्म्यहं कुनाथेन नपुंसा वीरमानिना॥ २८
niśamyākranditaṃ devī putrayornīyamānayoḥ|
hatāsmyahaṃ kunāthena napuṃsā vīramāninā|| 28
अर्थ
उर्वशीने जब गन्धर्वोंके द्वारा ले जाये जाते हुए अपने पुत्रके समान प्यारे भेड़ोंकी ‘बें-बें’ सुनी, तब वह कह उठी कि ‘अरे, इस कायरको अपना स्वामी बनाकर मैं तो मारी गयी। यह नपुंसक अपनेको बड़ा वीर मानता है। यह मेरे भेड़ोंको भी न बचा सका॥ २८॥