श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

यतो यतोऽसौ प्रहरत्परश्‍वधो

मनोऽनिलौजाः परचक्रसूदनः।

ततस्ततश्छिन्‍नभुजोरुकन्धरा

निपेतुरुर्व्यां हतसूतवाहनाः॥ ३१

yato yato'sau praharatparaśvadho

mano'nilaujāḥ paracakrasūdanaḥ|

tatastataśchinnabhujorukandharā

nipetururvyāṃ hatasūtavāhanāḥ|| 31

अर्थ

भगवान् परशुरामजीकी गति मन और वायुके समान थी। बस, वे शत्रुकी सेना काटते ही जा रहे थे। जहाँ-जहाँ वे अपने फरसेका प्रहार करते, वहाँ-वहाँ सारथि और वाहनोंके साथ बड़े-बड़े वीरोंकी बाँहें, जाँघें और कंधे कट-कटकर पृथ्वीपर गिरते जाते थे॥ ३१॥

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