श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.35

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

कृत्तबाहोः शिरस्तस्य गिरेः शृंगमिवाहरत्।

हते पितरि तत्पुत्रा अयुतं दुद्रुवुर्भयात्॥ ३५

kṛttabāhoḥ śirastasya gireḥ śṛṃgamivāharat|

hate pitari tatputrā ayutaṃ dudruvurbhayāt|| 35

अर्थ

जब उसकी बाँहें कट गयीं, तब उन्होंने पहाड़की चोटीकी तरह उसका ऊँचा सिर धड़से अलग कर दिया। पिताके मर जानेपर उसके दस हजार लड़के डरकर भग गये॥ ३५॥

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