और माहिष्मतीमें सहस्रबाहुने तथा उन्होंने जो कुछ किया था, सब अपने पिताजी तथा भाइयोंको कह सुनाया। सब कुछ सुनकर जमदग्नि मुनिने कहा—॥ ३७॥
स्वकर्म तत्कृतं रामः पित्रे भ्रातृभ्य एव च।
वर्णयामास तच्छ्रुत्वा जमदग्निरभाषत॥ ३७
और माहिष्मतीमें सहस्रबाहुने तथा उन्होंने जो कुछ किया था, सब अपने पिताजी तथा भाइयोंको कह सुनाया। सब कुछ सुनकर जमदग्नि मुनिने कहा—॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 79) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/37/