ब्राह्मणोंकी शोभा क्षमाके द्वारा ही सूर्यकी प्रभाके समान चमक उठती है। सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि भी क्षमावानोंपर ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं॥ ४०॥
क्षमया रोचते लक्ष्मीर्ब्राह्मी सौरी यथा प्रभा।
क्षमिणामाशु भगवांस्तुष्यते हरिरीश्वरः॥ ४०
ब्राह्मणोंकी शोभा क्षमाके द्वारा ही सूर्यकी प्रभाके समान चमक उठती है। सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि भी क्षमावानोंपर ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 80) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/40/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1135 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): लक्ष्मीर्ब्ह्मी → लक्ष्मीर्ब्राह्मी