परीक्षित्! गाधिकी कन्याका नाम था सत्यवती। ऋचीक ऋषिने गाधिसे उनकी कन्या माँगी। गाधिने यह समझकर कि ये कन्याके योग्य वर नहीं है, ऋचीकसे कहा—॥ ५॥
तस्य सत्यवतीं कन्यामृचीकोऽयाचत द्विजः।
वरं विसदृशं मत्वा गाधिर्भार्गवमब्रवीत्॥ ५
परीक्षित्! गाधिकी कन्याका नाम था सत्यवती। ऋचीक ऋषिने गाधिसे उनकी कन्या माँगी। गाधिने यह समझकर कि ये कन्याके योग्य वर नहीं है, ऋचीकसे कहा—॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 75) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/5/