श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

याच्यमानाः कृपणया राममात्रातिदारुणाः।

प्रसह्य शिर उत्कृत्य निन्युस्ते क्षत्रबन्धवः॥ १२

yācyamānāḥ kṛpaṇayā rāmamātrātidāruṇāḥ|

prasahya śira utkṛtya ninyuste kṣatrabandhavaḥ|| 12

अर्थ

परशुरामकी माता रेणुका बड़ी दीनतासे उनसे प्रार्थना कर रही थीं, परन्तु उन सबोंने उनकी एक न सुनी। वे बलपूर्वक महर्षि जमदग्‍निका सिर काटकर ले गये। परीक्षित्! वास्तवमें वे नीच क्षत्रिय अत्यन्त क्रूर थे॥ १२॥✎ 1643

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1643 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: परशु-रामजीसे → परशुरामजीसे

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