परशुरामजीने बहुत दूरसे माताका ‘हा राम!’ यह करुण-क्रन्दन सुन लिया। वे बड़ी शीघ्रतासे आश्रमपर आये और वहाँ आकर देखा कि पिताजी मार डाले गये हैं॥ १४॥✎ 1643
तदुपश्रुत्य दूरस्थो हा रामेत्यार्तवत्स्वनम्।
त्वरयाऽऽश्रममासाद्य ददृशे पितरं हतम्॥ १४
परशुरामजीने बहुत दूरसे माताका ‘हा राम!’ यह करुण-क्रन्दन सुन लिया। वे बड़ी शीघ्रतासे आश्रमपर आये और वहाँ आकर देखा कि पिताजी मार डाले गये हैं॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 81) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)