॥ श्रीहरिः ॥
स्वदेहं जमदग्निस्तु लब्ध्वा संज्ञानलक्षणम्।
ऋषीणां मण्डले सोऽभूत् सप्तमो रामपूजितः॥ २४
svadehaṃ jamadagnistu labdhvā saṃjñānalakṣaṇam|
ṛṣīṇāṃ maṇḍale so'bhūt saptamo rāmapūjitaḥ|| 24
अर्थ
महर्षि जमदग्निको स्मृतिरूप संकल्पमय शरीरकी प्राप्ति हो गयी। परशुरामजीसे सम्मानित होकर वे सप्तर्षियोंके मण्डलमें सातवें ऋषि हो गये॥ २४॥
स्वदेहं जमदग्निस्तु लब्ध्वा संज्ञानलक्षणम्।
ऋषीणां मण्डले सोऽभूत् सप्तमो रामपूजितः॥ २४
महर्षि जमदग्निको स्मृतिरूप संकल्पमय शरीरकी प्राप्ति हो गयी। परशुरामजीसे सम्मानित होकर वे सप्तर्षियोंके मण्डलमें सातवें ऋषि हो गये॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 82) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/24/