श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः।

उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥ २६

āste'dyāpi mahendrādrau nyastadaṇḍaḥ praśāntadhīḥ|

upagīyamānacaritaḥ siddhagandharvacāraṇaiḥ|| 26

अर्थ

वे आज भी किसीको किसी प्रकारका दण्ड न देते हुए शान्त चित्तसे महेन्द्र पर्वतपर निवास करते हैं। वहाँ सिद्ध, गन्धर्व और चारण उनके चरित्रका मधुर स्वरसे गान करते रहते हैं॥ २६॥

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