श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

विश्‍वामित्रस्य चैवासन् पुत्रा एकशतं नृप।

मध्यमस्तु मधुच्छन्दा मधुच्छन्दस एव ते॥ २९

viśvāmitrasya caivāsan putrā ekaśataṃ nṛpa|

madhyamastu madhucchandā madhucchandasa eva te|| 29

अर्थ

परीक्षित्! विश्‍वामित्रजीके सौ पुत्र थे। उनमें बिचले पुत्रका नाम था मधुच्छन्दा। इसलिये सभी पुत्र ‘मधुच्छन्दा’ के ही नामसे विख्यात हुए॥ २९॥

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