शर्मिष्ठाने इस प्रकार बड़ी कड़ी-कड़ी बात कहकर गुरुपुत्री देवयानीका तिरस्कार किया और क्रोधवश उसके वस्त्र छीनकर उसे कूएँमें ढकेल दिया॥ १७॥
एवंविधैः सुपरुषैः क्षिप्त्वाऽऽचार्यसुतां सतीम्।
शर्मिष्ठा प्राक्षिपत् कूपे वास आदाय मन्युना॥ १७
शर्मिष्ठाने इस प्रकार बड़ी कड़ी-कड़ी बात कहकर गुरुपुत्री देवयानीका तिरस्कार किया और क्रोधवश उसके वस्त्र छीनकर उसे कूएँमें ढकेल दिया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 87) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/18/17/