जब मानिनी देवयानीको यह मालूम हुआ कि शर्मिष्ठाको भी मेरे पतिके द्वारा ही गर्भ रहा था, तब वह क्रोधसे बेसुध होकर अपने पिताके घर चली गयी॥ ३४॥
गर्भसम्भवमासुर्या भर्तुर्विज्ञाय मानिनी।
देवयानी पितुर्गेहं ययौ क्रोधविमूर्च्छिता॥ ३४
जब मानिनी देवयानीको यह मालूम हुआ कि शर्मिष्ठाको भी मेरे पतिके द्वारा ही गर्भ रहा था, तब वह क्रोधसे बेसुध होकर अपने पिताके घर चली गयी॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 89) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/18/34/