जलाशयके पास पहुँचनेपर उन सुन्दरी कन्याओंने अपने-अपने वस्त्र तो घाटपर रख दिये और उस तालाबमें प्रवेश करके वे एक-दूसरेपर जल उलीच-उलीचकर क्रीडा करने लगीं॥ ८॥
ता जलाशयमासाद्य कन्याः कमललोचनाः।
तीरे न्यस्य दुकूलानि विजह्रुः सिंचतीर्मिथः॥ ८
जलाशयके पास पहुँचनेपर उन सुन्दरी कन्याओंने अपने-अपने वस्त्र तो घाटपर रख दिये और उस तालाबमें प्रवेश करके वे एक-दूसरेपर जल उलीच-उलीचकर क्रीडा करने लगीं॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 86) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/18/8/