॥ श्रीहरिः ॥
वीतिहोत्रस्त्विन्द्रसेनात् तस्य सत्यश्रवा अभूत्।
उरुश्रवाः सुतस्तस्य देवदत्तस्ततोऽभवत्॥ २०
vītihotrastvindrasenāt tasya satyaśravā abhūt|
uruśravāḥ sutastasya devadattastato'bhavat|| 20
अर्थ
इन्द्रसेनसे वीतिहोत्र, उससे सत्यश्रवा, सत्यश्रवासे उरुश्रवा और उससे देवदत्तकी उत्पत्ति हुई॥ २०॥
वीतिहोत्रस्त्विन्द्रसेनात् तस्य सत्यश्रवा अभूत्।
उरुश्रवाः सुतस्तस्य देवदत्तस्ततोऽभवत्॥ २०
इन्द्रसेनसे वीतिहोत्र, उससे सत्यश्रवा, सत्यश्रवासे उरुश्रवा और उससे देवदत्तकी उत्पत्ति हुई॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 13) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/2/20/