श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तत्सुतः केवलस्तस्माद् बन्धुमान् वेगवांस्ततः।

बन्धुस्तस्याभवद् यस्य तृणबिन्दुर्महीपतिः॥ ३०

tatsutaḥ kevalastasmād bandhumān vegavāṃstataḥ|

bandhustasyābhavad yasya tṛṇabindurmahīpatiḥ|| 30

अर्थ

नरसे केवल, केवलसे बन्धुमान्, बन्धुमान्से वेगवान्, वेगवान्से बन्धु और बन्धुसे राजा तृणबिन्दुका जन्म हुआ॥ ३०॥

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