श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तस्य तां करुणां वाचं निशम्य विपुलश्रमाम्।

कृपया भृशसन्तप्त इदमाहामृतं वचः॥ ११

tasya tāṃ karuṇāṃ vācaṃ niśamya vipulaśramām|

kṛpayā bhṛśasantapta idamāhāmṛtaṃ vacaḥ|| 11

अर्थ

चाण्डालकी वह करुणापूर्ण वाणी जिसके उच्चारणमें भी वह अत्यन्त कष्ट पा रहा था, सुनकर रन्तिदेव दयासे अत्यन्त सन्तप्त हो उठे और ये अमृतमय वचन कहने लगे॥ ११॥✎ 881

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #881 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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