संकृतिके दो पुत्र हुए—गुरु और रन्तिदेव। परीक्षित्! रन्तिदेवका निर्मल यश इस लोक और परलोकमें सब जगह गाया जाता है॥ २॥
गुरुश्च रन्तिदेवश्च संकृतेः पाण्डुनन्दन।
रन्तिदेवस्य हि यश इहामुत्र च गीयते॥ २
संकृतिके दो पुत्र हुए—गुरु और रन्तिदेव। परीक्षित्! रन्तिदेवका निर्मल यश इस लोक और परलोकमें सब जगह गाया जाता है॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 100) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/21/2/