॥ श्रीहरिः ॥
तत्सुतो विशदस्तस्य सेनजित् समजायत।
रुचिराश्वो दृढहनुः काश्यो वत्सश्च तत्सुताः॥ २३
tatsuto viśadastasya senajit samajāyata|
rucirāśvo dṛḍhahanuḥ kāśyo vatsaśca tatsutāḥ|| 23
अर्थ
जयद्रथका पुत्र हुआ विशद और विशदका सेनजित्। सेनजित्के चार पुत्र हुए—रुचिराश्व, दृढहनु, काश्य और वत्स॥ २३॥
तत्सुतो विशदस्तस्य सेनजित् समजायत।
रुचिराश्वो दृढहनुः काश्यो वत्सश्च तत्सुताः॥ २३
जयद्रथका पुत्र हुआ विशद और विशदका सेनजित्। सेनजित्के चार पुत्र हुए—रुचिराश्व, दृढहनु, काश्य और वत्स॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 102) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/21/23/