जब शूद्र खा-पीकर चला गया, तब कुत्तोंको लिये हुए एक और अतिथि आया। उसने कहा—‘राजन्! मैं और मेरे ये कुत्ते बहुत भूखे हैं। हमें कुछ खानेको दीजिये’॥ ८॥✎ 881
याते शूद्रे तमन्योऽगादतिथिः श्वभिरावृतः।
राजन् मे दीयतामन्नं सगणाय बुभुक्षते॥ ८
जब शूद्र खा-पीकर चला गया, तब कुत्तोंको लिये हुए एक और अतिथि आया। उसने कहा—‘राजन्! मैं और मेरे ये कुत्ते बहुत भूखे हैं। हमें कुछ खानेको दीजिये’॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 100) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/21/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)