॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.22.1
अथ द्वाविंशोऽध्यायः
पांचाल, कौरव और मगधदेशीय राजाओंके वंशका वर्णन
श्रीशुक उवाच
मित्रेयुश्च दिवोदासाच्च्यवनस्तत्सुतो नृप।
सुदासः सहदेवोऽथ सोमको जन्तुजन्मकृत्॥ १
mitreyuśca divodāsāccyavanastatsuto nṛpa|
sudāsaḥ sahadevo'tha somako jantujanmakṛt|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! दिवोदासका पुत्र था मित्रेयु। मित्रेयुके चार पुत्र हुए—च्यवन, सुदास, सहदेव और सोमक। सोमकके सौ पुत्र थे, उनमें सबसे बड़ा जन्तु और सबसे छोटा पृषत था। पृषतके पुत्र द्रुपद थे, द्रुपदके द्रौपदी नामकी पुत्री और धृष्टद्युम्न आदि पुत्र हुए॥ १-२॥