श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

ततो विदूरथस्तस्मात् सार्वभौमस्ततोऽभवत्।

जयसेनस्तत्तनयो राधिकोऽतोऽयुतो ह्यभूत्॥ १०

tato vidūrathastasmāt sārvabhaumastato'bhavat|

jayasenastattanayo rādhiko'to'yuto hyabhūt|| 10

अर्थ

सुरथका विदूरथ, विदूरथका सार्वभौम, सार्वभौमका जयसेन, जयसेनका राधिक और राधिकका पुत्र हुआ अयुत॥ १०॥

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