श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

देवापिः शन्तनुस्तस्य बाह्लीक इति चात्मजाः।

पितृराज्यं परित्यज्य देवापिस्तु वनं गतः॥ १२

devāpiḥ śantanustasya bāhlīka iti cātmajāḥ|

pitṛrājyaṃ parityajya devāpistu vanaṃ gataḥ|| 12

अर्थ

प्रतीपके तीन पुत्र थे—देवापि, शन्तनु और बाह्लीक। देवापि अपना पैतृक राज्य छोड़कर वनमें चला गया॥ १२॥

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