श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

गान्धार्यां धृतराष्ट्रस्य जज्ञे पुत्रशतं नृप।

तत्र दुर्योधनो ज्येष्ठो दुःशला चापि कन्यका॥ २६

gāndhāryāṃ dhṛtarāṣṭrasya jajñe putraśataṃ nṛpa|

tatra duryodhano jyeṣṭho duḥśalā cāpi kanyakā|| 26

अर्थ

परीक्षित्! धृतराष्ट्रकी पत्‍नी थी गान्धारी। उसके गर्भसे सौ पुत्र हुए, उनमें सबसे बड़ा था दुर्योधन। कन्याका नाम था दुःशला॥ २६॥

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