पाण्डुकी दूसरी पत्नीका नाम था माद्री। दोनों अश्विनीकुमारोंके द्वारा उसके गर्भसे नकुल और सहदेवका जन्म हुआ। परीक्षित्! इन पाँच पाण्डवोंके द्वारा द्रौपदीके गर्भसे तुम्हारे पाँच चाचा उत्पन्न हुए॥ २८॥
नकुलः सहदेवश्च माद्र्यां नासत्यदस्रयोः।
द्रौपद्यां पंच पंचभ्यः पुत्रास्ते पितरोऽभवन्॥ २८
पाण्डुकी दूसरी पत्नीका नाम था माद्री। दोनों अश्विनीकुमारोंके द्वारा उसके गर्भसे नकुल और सहदेवका जन्म हुआ। परीक्षित्! इन पाँच पाण्डवोंके द्वारा द्रौपदीके गर्भसे तुम्हारे पाँच चाचा उत्पन्न हुए॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.22.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 107) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/22/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#2055 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): माद्रॺां ना → माद्र्यां ना