श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

नकुलः सहदेवश्‍च माद्र्यां नासत्यदस्रयोः।✎ 2055

द्रौपद्यां पंच पंचभ्यः पुत्रास्ते पितरोऽभवन्॥ २८

nakulaḥ sahadevaśca mādryāṃ nāsatyadasrayoḥ|

draupadyāṃ paṃca paṃcabhyaḥ putrāste pitaro'bhavan|| 28

अर्थ

पाण्डुकी दूसरी पत्‍नीका नाम था माद्री। दोनों अश्‍विनीकुमारोंके द्वारा उसके गर्भसे नकुल और सहदेवका जन्म हुआ। परीक्षित्! इन पाँच पाण्डवोंके द्वारा द्रौपदीके गर्भसे तुम्हारे पाँच चाचा उत्पन्‍न हुए॥ २८॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2055 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): माद्रॺां ना → माद्र्यां ना

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