श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.37

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

कावषेयं पुरोधाय तुरं तुरगमेधयाट्।

समन्तात् पृथिवीं सर्वां जित्वा यक्ष्यति चाध्वरैः॥ ३७

kāvaṣeyaṃ purodhāya turaṃ turagamedhayāṭ|

samantāt pṛthivīṃ sarvāṃ jitvā yakṣyati cādhvaraiḥ|| 37

अर्थ

यह कावषेय तुरको पुरोहित बनाकर अश्‍वमेध यज्ञ करेगा और सब ओरसे सारी पृथ्वीपर विजय प्राप्त करके यज्ञोंके द्वारा भगवान्‌की आराधना करेगा॥ ३७॥

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