श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.41

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तस्माच्च वृष्टिमांस्तस्य सुषेणोऽथ महीपतिः।

सुनीथस्तस्य भविता नृचक्षुर्यत् सुखीनलः॥ ४१

tasmācca vṛṣṭimāṃstasya suṣeṇo'tha mahīpatiḥ|

sunīthastasya bhavitā nṛcakṣuryat sukhīnalaḥ|| 41

अर्थ

जब हस्तिनापुर गंगाजीमें बह जायगा, तब वह कौशाम्बीपुरीमें सुखपूर्वक निवास करेगा। नेमिचक्रका पुत्र होगा चित्ररथ, चित्ररथका कविरथ, कविरथका वृष्टिमान्, वृष्टिमान्का राजा सुषेण, सुषेणका सुनीथ, सुनीथका नृचक्षु, नृचक्षुका सुखीनल, सुखीनलका परिप्लव, परिप्लवका सुनय, सुनयका मेधावी, मेधावीका नृपंजय, नृपंजयका दूर्व और दूर्वका पुत्र तिमि होगा॥ ४०-४२॥

यह अर्थ श्लोक 40–42 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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