श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.44

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

दण्डपाणिर्निमिस्तस्य क्षेमको भविता नृपः।

ब्रह्मक्षत्रस्य वै प्रोक्तो वंशो देवर्षिसत्कृतः॥ ४४

daṇḍapāṇirnimistasya kṣemako bhavitā nṛpaḥ|

brahmakṣatrasya vai prokto vaṃśo devarṣisatkṛtaḥ|| 44

अर्थ

तिमिसे बृहद्रथ, बृहद्रथसे सुदास, सुदाससे शतानीक, शतानीकसे दुर्दमन, दुर्दमनसे वहीनर, वहीनरसे दण्डपाणि, दण्डपाणिसे निमि और निमिसे राजा क्षेमकका जन्म होगा। इस प्रकार मैंने तुम्हें ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनोंके उत्पत्तिस्थान सोमवंशका वर्णन सुनाया। बड़े-बड़े देवता और ऋषि इस वंशका सत्कार करते हैं॥ ४३-४४॥

यह अर्थ श्लोक 43–44 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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