॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.23.1
अथ त्रयोविंशोऽध्यायः
अनु, द्रुह्यु, तुर्वसु और यदुके वंशका वर्णन
श्रीशुक उवाच
अनोः सभानरश्चक्षुः परोक्षश्च त्रयः सुताः।
सभानरात् कालनरः सृंजयस्तत्सुतस्ततः॥ १
anoḥ sabhānaraścakṣuḥ parokṣaśca trayaḥ sutāḥ|
sabhānarāt kālanaraḥ sṛṃjayastatsutastataḥ|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ययातिनन्दन अनुके तीन पुत्र हुए—सभानर, चक्षु और परोक्ष। सभानरका कालनर, कालनरका सृंजय, सृंजयका जनमेजय, जनमेजयका महाशील, महाशीलका पुत्र हुआ महामना। महामनाके दो पुत्र हुए—उशीनर एवं तितिक्षु॥ १-२॥✎ 1649