श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

विजयस्तस्य सम्भूत्यां ततो धृतिरजायत।

ततो धृतव्रतस्तस्य सत्कर्माधिरथस्ततः॥ १२

vijayastasya sambhūtyāṃ tato dhṛtirajāyata|

tato dhṛtavratastasya satkarmādhirathastataḥ|| 12

अर्थ

जयद्रथकी पत्‍नीका नाम था सम्भूति। उसके गर्भसे विजयका जन्म हुआ। विजयका धृति, धृतिका धृतव्रत, धृतव्रतका सत्कर्मा और सत्कर्माका पुत्र था अधिरथ॥ १२॥

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