श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.16

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

म्लेच्छाधिपतयोऽभूवन्‍नुदीचीं दिशमाश्रिताः।

तुर्वसोश्‍च सुतो वह्निर्वह्नेर्भर्गोऽथ भानुमान्॥ १६

mlecchādhipatayo'bhūvannudīcīṃ diśamāśritāḥ|

turvasośca suto vahnirvahnerbhargo'tha bhānumān|| 16

अर्थ

परीक्षित्! राजा कर्णके पुत्रका नाम था बृषसेन। ययातिके पुत्र द्रुह्युसे बभ्रुका जन्म हुआ। बभ्रुका सेतु, सेतुका आरब्ध, आरब्धका गान्धार, गान्धारका धर्म, धर्मका धृत, धृतका दुर्मना और दुर्मनाका पुत्र प्रचेता हुआ। प्रचेताके सौ पुत्र हुए, ये उत्तर दिशामें म्लेच्छोंके राजा हुए। ययातिके पुत्र तुर्वसुका वह्नि, वह्निका भर्ग, भर्गका भानुमान्, भानुमान्का त्रिभानु, त्रिभानुका उदारबुद्धि करन्धम और करन्धमका पुत्र हुआ मरुत। मरुत सन्तानहीन था। इसलिये उसने पूरुवंशी दुष्यन्तको अपना पुत्र बनाकर रखा था॥ १४—१७॥

यह अर्थ श्लोक 14–17 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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