श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तस्याहुकश्‍चाहुकी च कन्या चैवाहुकात्मजौ।

देवकश्‍चोग्रसेनश्‍च चत्वारो देवकात्मजाः॥ २१

tasyāhukaścāhukī ca kanyā caivāhukātmajau|

devakaścograsenaśca catvāro devakātmajāḥ|| 21

अर्थ

सात्वतके पुत्र अन्धकके चार पुत्र हुए—कुकुर, भजमान, शुचि और कम्बलबर्हि। उनमें कुकुरका पुत्र वह्नि, वह्निका विलोमा, विलोमाका कपोतरोमा और कपोतरोमाका अनु हुआ। तुम्बुरु गन्धर्वके साथ अनुकी बड़ी मित्रता थी। अनुका पुत्र अन्धक, अन्धकका दुन्दुभि, दुन्दुभिका अरिद्योत, अरिद्योतका पुनर्वसु और पुनर्वसुके आहुक नामका एक पुत्र तथा आहुकी नामकी एक कन्या हुई। आहुकके दो पुत्र हुए—देवक और उग्रसेन। देवकके चार पुत्र हुए॥ १९—२१॥

यह अर्थ श्लोक 19–21 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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