श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.32

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

साऽऽप दुर्वाससो विद्यां देवहूतीं प्रतोषितात्।

तस्या वीर्यपरीक्षार्थमाजुहाव रविं शुचिम्॥ ३२

sā''pa durvāsaso vidyāṃ devahūtīṃ pratoṣitāt|

tasyā vīryaparīkṣārthamājuhāva raviṃ śucim|| 32

अर्थ

पृथाने दुर्वासा ऋषिको प्रसन्‍न करके उनसे देवताओंको बुलानेकी विद्या सीख ली। एक दिन उस विद्याके प्रभावकी परीक्षा लेनेके लिये पृथाने परम पवित्र भगवान् सूर्यका आवाहन किया॥ ३२॥

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