॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.6
पुरुहोत्रस्त्वनोः पुत्रस्तस्यायुः सात्वतस्ततः।
भजमानो भजिर्दिव्यो वृष्णिर्देवावृधोऽन्धकः॥ ६
puruhotrastvanoḥ putrastasyāyuḥ sātvatastataḥ|
bhajamāno bhajirdivyo vṛṣṇirdevāvṛdho'ndhakaḥ|| 6
अर्थ
अनुसे पुरुहोत्र, पुरुहोत्रसे आयु और आयुसे सात्वतका जन्म हुआ। परीक्षित्! सात्वतके सात पुत्र हुए—भजमान, भजि, दिव्य, वृष्णि, देवावृध, अन्धक और महाभोज। भजमानकी दो पत्नियाँ थीं एकसे तीन पुत्र हुए—निम्लोचि, किंकिण और धृष्टि। दूसरी पत्नीसे भी तीन पुत्र हुए—शताजित्, सहस्राजित् और अयुताजित्॥ ६—८॥