महर्षि च्यवन और सुकन्याका चरित्र, राजा शर्यातिका वंश
श्रीशुक उवाच
शर्यातिर्मानवो राजा ब्रह्मिष्ठः स बभूव ह।
यो वा अंगिरसां सत्रे द्वितीयमह ऊचिवान्॥ १
śaryātirmānavo rājā brahmiṣṭhaḥ sa babhūva ha|
yo vā aṃgirasāṃ satre dvitīyamaha ūcivān|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! मनुपुत्र राजा शर्याति वेदोंका निष्ठावान् विद्वान् था। उसने अंगिरागोत्रके ऋषियोंके यज्ञमें दूसरे दिनका कर्म बतलाया था॥ १॥
शर्यातिर्मानवो राजा ब्रह्मिष्ठः स बभूव ह।
यो वा अंगिरसां सत्रे द्वितीयमह ऊचिवान्॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! मनुपुत्र राजा शर्याति वेदोंका निष्ठावान् विद्वान् था। उसने अंगिरागोत्रके ऋषियोंके यज्ञमें दूसरे दिनका कर्म बतलाया था॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 14) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/1/