श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.13

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

बाढमित्यूचतुर्विप्रमभिनन्द्य भिषक्तमौ।

निमज्जतां भवानस्मिन् ह्रदे सिद्धविनिर्मिते॥ १३✎ 1126

bāḍhamityūcaturvipramabhinandya bhiṣaktamau|

nimajjatāṃ bhavānasmin hrade siddhavinirmite|| 13

अर्थ

वैद्यशिरोमणि अश्‍विनीकुमारोंने महर्षि च्यवनका अभिनन्दन करके कहा, ‘ठीक है।’ और इसके बाद उनसे कहा कि ‘यह सिद्धोंके द्वारा बनाया हुआ कुण्ड है, आप इसमें स्नान कीजिये’॥ १३॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1126 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदे → ह्रदे

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