श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तदन्त आद्यमानम्य स्वाभिप्रायं न्यवेदयत्।

तच्छ्रुत्वा भगवान् ब्रह्मा प्रहस्य तमुवाच ह॥ ३१

tadanta ādyamānamya svābhiprāyaṃ nyavedayat|

tacchrutvā bhagavān brahmā prahasya tamuvāca ha|| 31

अर्थ

उत्सवके अन्तमें ब्रह्माजीको नमस्कार करके उन्होंने अपना अभिप्राय निवेदन किया। उनकी बात सुनकर भगवान् ब्रह्माजीने हँसकर उनसे कहा—॥ ३१॥

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