अपनी कन्याकी यह बात सुनकर शर्याति घबरा गये। उन्होंने धीरे-धीरे स्तुति करके बाँबीमें छिपे हुए च्यवन मुनिको प्रसन्न किया॥ ८॥✎ 1631
दुहितुस्तद् वचः श्रुत्वा शर्यातिर्जातसाध्वसः।
मुनिं प्रसादयामास वल्मीकान्तर्हितं शनैः॥ ८
अपनी कन्याकी यह बात सुनकर शर्याति घबरा गये। उन्होंने धीरे-धीरे स्तुति करके बाँबीमें छिपे हुए च्यवन मुनिको प्रसन्न किया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 15) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)