yat te pitāvadad dharmaṃ tvaṃ ca satyaṃ prabhāṣase|
dadāmi te mantradṛśe jñānaṃ brahma sanātanam|| 10
अर्थ
तब भगवान् रुद्रने कहा—‘तुम्हारे पिताने धर्मके अनुकूल निर्णय दिया है और तुमने भी मुझसे सत्य ही कहा है। तुम वेदोंका अर्थ तो पहलेसे ही जानते हो। अब मैं तुम्हें सनातन ब्रह्मतत्त्वका ज्ञान देता हूँ॥ १०॥
यत् ते पितावदद् धर्मं त्वं च सत्यं प्रभाषसे।
ददामि ते मन्त्रदृशे ज्ञानं ब्रह्म सनातनम्॥ १०
तब भगवान् रुद्रने कहा—‘तुम्हारे पिताने धर्मके अनुकूल निर्णय दिया है और तुमने भी मुझसे सत्य ही कहा है। तुम वेदोंका अर्थ तो पहलेसे ही जानते हो। अब मैं तुम्हें सनातन ब्रह्मतत्त्वका ज्ञान देता हूँ॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 19) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/10/