उनके यज्ञोंमें देवताओंके साथ जब सदस्य और ऋत्विज् बैठ जाते थे, तब उनकी पलकें नहीं पड़ती थीं और वे अपने सुन्दर वस्त्र और वैसे ही रूपके कारण देवताओंके समान दिखायी पड़ते थे॥ २३॥
यस्य क्रतुषु गीर्वाणैः सदस्या ऋत्विजो जनाः।
तुल्यरूपाश्चानिमिषा व्यदृश्यन्त सुवाससः॥ २३
उनके यज्ञोंमें देवताओंके साथ जब सदस्य और ऋत्विज् बैठ जाते थे, तब उनकी पलकें नहीं पड़ती थीं और वे अपने सुन्दर वस्त्र और वैसे ही रूपके कारण देवताओंके समान दिखायी पड़ते थे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 21) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/23/