उनकी अनन्य प्रेममयी भक्तिसे प्रसन्न होकर भगवान्ने उनकी रक्षाके लिये सुदर्शन चक्रको नियुक्त कर दिया था, जो विरोधियोंको भयभीत करनेवाला एवं भगवद्भक्तोंकी रक्षा करनेवाला है॥ २८॥
तस्मा अदाद्धरिश्चक्रं प्रत्यनीकभयावहम्।
एकान्तभक्तिभावेन प्रीतो भृत्याभिरक्षणम्॥ २८
उनकी अनन्य प्रेममयी भक्तिसे प्रसन्न होकर भगवान्ने उनकी रक्षाके लिये सुदर्शन चक्रको नियुक्त कर दिया था, जो विरोधियोंको भयभीत करनेवाला एवं भगवद्भक्तोंकी रक्षा करनेवाला है॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 22) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/4/28/