देखो, ये बड़े बुद्धिमान् आंगिरसगोत्रके ब्राह्मण इस समय एक बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं। परन्तु मेरे विद्वान् पुत्र! वे प्रत्येक छठे दिन अपने कर्ममें भूल कर बैठते हैं॥ ३॥
इमे अंगिरसः सत्रमासतेऽद्य सुमेधसः।
षष्ठं षष्ठमुपेत्याहः कवे मुह्यन्ति कर्मणि॥ ३
देखो, ये बड़े बुद्धिमान् आंगिरसगोत्रके ब्राह्मण इस समय एक बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं। परन्तु मेरे विद्वान् पुत्र! वे प्रत्येक छठे दिन अपने कर्ममें भूल कर बैठते हैं॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 19) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/3/